Banking

कैश की किल्लत

 

देश के कई छोटे-बड़े शहरों में एटीएम से कैश गायब होने की खबर से हड़कंप मच गया है. बड़ी संख्या में लोग एटीएम में पहुंचने लगे, हालांकि वित्त मंत्री ने साफ़ किया कि कैश की कोई कमी नहीं है. अब वित्त मंत्रालय ने एक हफ्ते  में कैश की किल्लत दूर करने का दावा किया है. बनारस, भोपाल, पटना, हैदराबाद- हर जगह एटीएम ख़ाली दिखे और लोगों की भीड़ दिखी. खबर चल पड़ी थी कि एटीएम में पैसा नहीं है.

वहीं वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश में कैश के हालात का जायज़ा लिया. कुल मिलाकर पर्याप्त से ज़्यादा कैश बाज़ार में है और बैंकों के पास भी है. कुछ इलाक़ों में अचानक और बढ़ी हुई मांग से पैदा हुई क़िल्लत से जल्द ही निबटा जा रहा है. बैंकिग सचिव राजीव कुमार ने एनडीटीवी से कहा कि 85 फ़ीसदी एटीएम मशीनों में कैश है. 10 से 12 फीसदी मशीनें हमेशा रखरखाव में रहती हैं. लेकिन फिर संकट क्यों है?

क्यों हो रही कैश की क़िल्लत?

1- फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल का डर. इस बिल के मुताबिक, अगर कोई बैंक डूब रहा हो, दिवालिया हो रहा हो तो आपके जो पैसे वहां जमा हैं उनकी क्या गारंटी है, बैंक कितने पैसे लौटाने के लिए बाध्य हैं?

2- इस बिल के मुताबिक, खाताधारकों के जमा पैसे का इस्तेमाल बैंक को उबारने में किया जा सकता है. डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन भी खत्म किया जाना है. इसके तहत खाताधारकों को एक लाख रुपये तक लौटाने की गारंटी मिली है.

3- ग्राहकों के पैसों से बैंकों की सेहत सुधारने का प्रावधान, बिल के चैप्टर 4 सेक्शन 2 को लेकर भी है. इसके मुताबिक रेज़ोल्यूशन कॉरपोरेशन रेग्यूलेटर से सलाह-मश्विरे के बाद यह तय करेगा कि दिवालिया बैंक के जमाकर्ता को उसके जमा पैसे के बदले कितनी रकम दी जाए. वह तय करेगा कि जमाकर्ता को कोई खास रकम मिले या फिर खाते में जमा पूरा पैसा.

4- लगातार बढ़ रहे NPA की वजह से ग्राहकों में घबराहट है. सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 1,250 करोड़ रुपये का भारी भरकम नुकसान हुआ है

5- डर की वजह से बैंकों, ATM से ज़्यादा पैसे निकालने की होड़

6- एक साल से 2000 को नोटों का छपना क़रीब-क़रीब बंद, वहीं एसबीआई के डिप्‍युटी एमडी नीरज व्यास का कहना है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में नहीं आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि एटीएम में हम 2000 रुपये के जितने भी नोट डालते हैं, वे निकल जाते हैं, लेकिन फिर काउंटर पर नहीं लौटते.

7- 200 के नोटों के लिए 70 फ़ीसदी एटीएम तैयार नहीं यानि इन एटीएम मशीन को अपटेड किया जाना है.

8- कृषि क्षेत्र में खरीद-फरोख्त में  बढ़ोतरी हुई है जिसकी वजह से भी बाजार से ज्‍यादा निकाला जा रहा है.

9- यह शादियों का सीजन है और ऐसे में लोग पैसे निकालकर अपने पास रख रहे हैं ताकि बाद में दिक्‍कत कम हो.

10- कंपनियों द्वारा वित्तीय साल का क्लोज़र

RBI का कहना

1- जहां कमी वहां नक़द भेजने का निर्देश

2- सरप्लस कैश रखने वाले बैंकों को निर्देश

3- कैश की मांग बढ़ी

4- डिमांड-सप्लाई का अंतर बढ़ा

5- ATM से ट्रांज़ैक्शन बढ़ा

6- अब 3000 की जगह 5000 औसत निकासी

7- देवास में नोटों की छपाई कुछ दिन रुकी

8- कर्मचारी पैसे चुराते पकड़ा गया था

9- नोटबंदी के पहले 17.74 लाख करोड़ बाज़ार में थे और अब 18.04 लाख करोड़ बाज़ार में

10- चुनाव के लिए जमा की जा रही नक़दी

देश में गहराते नकदी संकट के बीच मध्य प्रदेश के देवास जिले में स्थित बैंक नोट प्रेस में नोटों की छपाई की रफ्तार बढ़ा दी गई है. मंगलवार से नोट छपाई का काम तीनों पाली में शुरू हो गया है. बैंक नोट प्रेस के सूत्रों के अनुसार, अभी तक दो पाली में ही नोट छपाई का काम चल रहा था, लेकिन मंगलवार से तीनों पालियों में नोट छपाई का काम शुरू हो गया है. देवास में 500 तथा 200 रुपये मूल्य के नोट छापे जा रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि नोटों की बढ़ती किल्लत के कारण ही नोट छपाई में तेजी लाई गई है. तीनों पालियों में छपाई का काम होने से नोट उत्पादन में इजाफा होगा.

उल्लेखनीय है कि इन दिनों एटीएम में नोटों की कमी के कारण देश के कई हिस्सों में विषम हालात बन रहे हैं. लोगों को एटीएम पर कतार में लगना पड़ रहा है, तो कई एटीएम में नोट ही नहीं हैं.

आज नगदी की इस रहस्यमयी कमी के जो भी कारण बताये जा रहे हैं, सरकार और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की इस मुत्तालिक असफलता को नही नकारा जा सकता। और क्या उम्मीद की जा सकती थी कालाधन और जमाखोरी को रोकने के नाम पर २००० के बड़े नोट और साइज में छोटे लाने की जिस कारण तो कालाधन और करेंसी के जमाखोरों को तो और सहूलियत हो गयी।

२००० के करेंसी नोट तो वास्तव में सर्कुलेशन से बाहर होते जा रहे हैं चूँकि ये जमाखोरों के पास इकठ्ठे हो रहे हैं- भ्रस्टाचार के लिए उपर्युक्त हैं लेनदेन में।

 

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