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एंजियोप्लास्टी(दिल की सर्जरी) के बाद धूम्रपान छोड़ना

आजकल की तेज रफ्तार जीवनशैली के चलते दिल से जुड़ी बीमारियां भी तेज रफ्तार से बढ़ती जा रही है। बुजुर्ग ही नहीं कम उम्र के लोग भी इसकी जद में आ रहे हैं। लिहाजा दिल से जुड़ी परेशानी के लिए की जाने वाली तरह-तरह की सर्जरी भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसी ही सर्जरी है एंजियोप्लास्टी। भले ही यह सर्जरी आम हो गई हो लेकिन इससे जुड़ी सावधानी और खतरे के बारे में जानना बेहद जरूरी। हृदय रोगों और हार्ट अटैक की सबसे बड़ी वजह हृदय की धमनियों और शिराओं में कोलेस्ट्रॉल का जमा होना है। कोलेस्ट्रॉल जमा होने से नलियां अंदर से संकरी हो जाती हैं जिससे हार्ट तक पर्याप्त बहाव के साथ खून नहीं पहुंच पाता। धीरे-धीरे ये नलियां बंद होने लगती हैं और हार्ट अटैक तक की नौबत आ जाती है। यदि आपके भी हृदय की रक्त धमनियां संकरी हैं तो हार्ट एंजियोप्लास्टी की जा सकती है। इस प्रक्रिया में रक्त प्रवाह बेहतर बनाने के लिए कैथेटर के आखिर में लगे बैलून का उपयोग रक्त धमनी खोलने के लिए किया जाता है। रक्त धमनी को खुला रखने के लिए एक स्टेंट लगाया जा सकता है। स्टेंट तार की नली जैसा छोटा उपकारण होता है। एंजियोप्लास्टी सर्जरी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि ब्लॉकेज कौन सी आर्टरी में हुई है। पैरीफेरल आर्टरी में एंजियोप्लास्टी सर्जरी लगभग 98 फीसदी तक सफल रहती है। एंजियोप्लास्टी कराने वाले महज 10 प्रतिशत रोगियों के फिर से ब्लॉकेज होने की आशंका रहती है। ब्लॉकेज का जल्द पता चल जाता है तो इसके सफल होने की गारंटी और बढ़ जाती है। अब शरीर की सभी आर्टरीज की एंजियोप्लॉस्टी की जा सकती है।

हृदय एवं रक्त वाहिनियों के रोग  हृदय रोग,  तंबाकू ६ महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर्स (डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, तम्बाखू का प्रयोग, व्यायाम न करना और परिवार में किसी को ह्रदय रोग होना) में से सबसे महत्वपूर्ण है. यह सबसे महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इसे सबसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. तंबाकू के किसी भी रूप में सेवन से ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है. सिगरेट के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड होने के कारण रक्त में कार्बोक्सिहीमोग्लोबिन बन जाता है जो कि एनजाइना को और बढ़ाता है. जिन मरीजों में एंजियोप्लास्टी या बाई पास किया गया है यदि वे सिगरेट व तंबाकू का सेवन न छोड़ें तो उनमें दोबारा ब्लॉकेड होने की बहुत अधिक संभावना होती है. जिन लोगों को हार्टअटैक या फालिज का अटैक हो चुका है वे यदि सिगरेट व तंबाकू का सेवन छोड़ देते हैं तो उनमें दोबारा अटैक होने की संभावना काफी कम हो जाती है.

सिगरेट पीने को छोड़ने पर होने वाले फायदों पर अब कोई संदेह नहीं है। जो लोग हृदय बीमारी के शिकार हैं, उनमें हृदय संबंधी समस्याओं से बचाव के तौर पर धूम्रपान त्यागने पर ७ से ४७ फीसदी तक असर कम होता है। ऐसे ही फायदे हृदय संबंधी बीमारी के शिकार मरीजों में देखे गए।

  जितनी जल्दी धूम्रपान छोड़ें, उतने ही ज़्यादा फ़ायदे मिलेंगे.

  • जो लोग ५० की उम्र से पहले धूम्रपान त्याग देते हैं, उनमें अगले १५ सालों में इससे होने वाले खतरे खत्म हो जाते है बनिस्बत उन लोगों के जो लगातार धूम्रपान करते रहते हैं।

  • सिगरेट पीने से हृदय संबंधी बीमारी का खतरा होता है और धूम्रपान बंद कर देने से इसमें तेजी से गिरावट आती है।

  • धूम्रपान छोड़ने के एक साल बाद हृदय संबंधी बीमारी से होने वाली मौत में ५० फीसदी की कमी आ जाती है और अगर इसे लगातार जारी रखा गया तो खतरा और कम होता जाता है।

  • धूम्रपान त्यागने के दो सालों बाद हार्ट अटैक के खतरे में कमी गैर धूम्रपान वालों के समान हो जाती है।

  • अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों में जो धूम्रपान बंद कर देते हैं तो उनके आगे फेफड़ों को नुकसान नहीं होता।

  • फेफड़ों के कैंसर की वजह ९० फीसदी में सिगरेट पीना होता है। धूम्रपान त्यागने से फेफड़े के कैंसर में अगले पांच सालों में कमी लाई जा सकती है और १५ सालों में यह कमी गैर धूम्रपान करने वालों के जितनी हो जाती है।

  • गैर धूम्रपान करने वालों में जितना खतरा ऑस्टियोपोरोसिस का होता है, वह धूम्रपान के त्यागने के १० सालों में हासिल होता है।

  • जब आप धूम्रपान त्यागते हैं तो इससे आपका वज़न बढ़ सकता है क्योंकि इसे बंद करने के बाद लोग ज्यादा खाने लगते हैं। पहले दो हफ्तों में १ से २ किलो और अगले चार से पांच महीनों में यह ३ से ४ किलो तक वज़न बढ़ सकता है। औसतन वज़न में बढ़ोतरी ४ से ५ किलो होती है। धूम्रपान बंद कर देने का सम्बंध व्यायाम के कार्यक्रम पर भी पड़ता है और सही खुराक लेकर वज़न को नियंत्रित रखा जा सकता है। इस तरह धूम्रपान त्यागने के फायदे कहीं ज्यादा हैं बनिस्बत महज वज़न बढ़ने के नुकसान के।

धूम्रपान और हृदय

  • एक दिन में 20 सिगरेट पीने से महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा 6 गुना बढ़ जाता है।

  • एक दिन में 20 सिगरेट पीने से पुरूशों में हार्ट अटैक का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है।

  • प्हली बार हार्ट अटैक के लिए धूम्रपान 36 फीसदी मरीजों में जिम्मेदार होता है।

  • ऐसे हृदय रोगी जो लगातार धूम्रपान करते रहते हैं उनमें दूसरे हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है साथ अकस्मात मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।

  • बाई पास सर्जरी के बाद लगातार धूम्रपान करते रहने से मृत्यु, हृदय सम्बंधी बीमारी से मौत या फिर से बाईपास का खतरा ज्यादा होता है।

  • एंजियोप्लास्टी के बाद लगातार धूम्रपान करने से मौत और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

  • जिन मरीजों में हार्ट फंक्शनिंग 35 फीसदी से कम हो, उनमें धूम्रपान से मौत का खतरा अधिक होता है।

  • जो लोग लगातार धूम्रपान करते रहते हैं, उनमें हो सकता है कि ब्लड प्रेशर की दवाएं असर न करें।

यदि एंजियोप्लास्टी या बायपास करवाकर भी ये व्यसन नहीं छोड़ा तो अगली प्रक्रिया के लिए भी पहले ही सामान बंध जाता है। बशर्ते कि जीवित रहे। लोग  इसे छोड़ने की कोशिश भी करते हैं, पर निकोटीन न मिलने पर उन्हें जो बेचैनी होती है उसके कारण वे इस को छोड़ नहीं पाते। जो लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं उनको भी कोई भी नशा छोड़ने में अत्यधिक परेशानी होती है. सिगरेट व तंबाकू को छोड़ने के लिए कुछ विशेष दवाएं सहायता करती हैं जिनको डॉक्टर्स की देखरेख में ही लेना होता है. निकोटीन न मिलने से जो बेचैनी होती है (nicotine withdrawl) उसे कम करने के लिए निकोटीन च्युइंग गम ली जा सकती हैं जोकि हमारे यहाँ आसानी से उपलब्ध हैं. इसका छोटा सा टुकड़ा तोड़ कर मुँह में डालना पर्याप्त रहता है. इसको लेने से व्यक्ति सिगरेट के धुएँ, तम्बाखू की पत्ती व पान मसाले में मौजूद अन्य विषैले पदार्थों से बच जाता है. एक बार च्युइंग गम पर शिफ्ट होने के बाद धीरे धीरे उसको बंद किया जा सकता है

एंजियोप्लास्टी के बाद लगातार धूम्रपान करने से मौत और हृदयाघात का ख़तरा बढ़ जाता है। जिन मरीज़ों में हार्ट फंक्शनिंग ३५ फ़ीसदी से कम हो, उनमें धूम्रपान से मौत का ख़तरा ज़्यादा होता है । जो लोग लगातार धूम्रपान करते रहते हैं, उनमें हो सकता है कि रक्त दाब (ब्लड प्रेशर) की दवाएं असर न करें।

धूम्रपान की खतरनाक आदत को छोड़ने के लिए कुछ उपाय-

– निकोटिन प्रतिस्थापन उपचार जैसे कि निकोटिन गम, नेजल स्प्रे या इनहेलर्स की मदद से तंबाकू की तलब पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।

– ट्रिगर की पहचान करना महत्वपूर्ण है। यह देखना होगा कि क्या चीज आपको किसी भी रूप में तम्बाकू का उपयोग करने के लिए उकसाती है और इससे बचने की जरूरत है।

– तंबाकू की लालसा होने पर शर्करा रहित गम, हार्ड कैंडी, कच्चे गाजर, अजवाइन, मूंगफली या सूरजमुखी के बीज चबाए जा सकते हैं।

– किसी भी रूप में व्यायाम या शारीरिक गतिविधि से तंबाकू की इच्छा को कम करने में मदद मिल सकती है। योग और ध्यान जैसे तकनीकों का विकल्प भी चुन सकते हैं।

वह जिंदादिल था और हर फिक्र को धुँए में उड़ाता था। मैंने उससे सिगरेट छोड़ने का कईं बार आग्रह किया, लेकिन असफल रहा। एंजियोप्लास्टी ने उसकी सिगरेट छुड़ा दी। मगर सिगरेट से बिछोह शायद वह बर्दाश्त नहीं कर सका।

सिगरेट खरीदते वक्‍त खुद से ये सवाल करें

सिगरेट खरीदते वक्‍त खुद से सवाल करें….

1. यदि आप छात्र हैं तो खुद से पूछें- क्‍या मैं अपने माता-पिता की कमाई से मौत खरीद रहा हूं?

2. यदि आप नौकरी करते हैं, बेचलर हैं- क्‍या मैं इसी के लिये कमा रहा हूं?

3. यदि आप एक पति हैं- यदि मैं जल्‍दी मर गया, तो क्‍या मेरी पत्‍नी मेरे बगैर रह सकेगी?

4. यदि आप पिता हैं- तो सवाल करें, इस सिगरेट के बदले मैं अपने बच्‍चों के लिये क्‍या खरीद सकता हूं?

अपने आस-पास के लोगों को बतायें

यदि आप सिगरेट छोड़ने का मन बना चुके हैं, तो अपने आस-पास के लोगों को बतायें कि आप सिगरेट छोड़ने जा रहे हैं। 

जेब में चिल्‍लर मत रखें

जेब में चिल्‍लर मत रखें यदि आप सिगरेट छोड़ने जा रहे हैं, तो सबसे पहले पूरा पैकेट खरीदना बंद कर दें। जाहिर सी बात है, बाहर निकलते ही आपका मन एक सिगरेट पीने का होगा। यदि आपकी जेब में चिल्‍लर यानी खुले पैसे हैं, तो आप तुरंत दुकान पर जाकर सिगरेट खरीद लेंगे। लिहाजा यदि आप कुछ दिनों तक अपनी जेब में 100 या 500 के नोट रखेंगे, तो 7 रुपए की सिगरेट खरीदने से पहले दस बार सोचेंगे। हो सकता है दुकानदार ही आपको मना कर दे।

सफल लोगों के बारे में पढ़ें

तमाम सफल लोग हैं, जो पहले सिगरेट का सेवन करते थे, बाद में छोड़ दी। आप उनकी सक्‍सेस स्‍टोरी पढ़ें और देखें, कि सिगरेट छोड़ने के बाद उनके जीवन में क्‍या बदलाव आये।

एक दिन में नहीं छोड़ें

यदि आप सिगरेट छोड़ने जा रहे हैं, तो धीरे-धीरे छोड़ें। एक दिन में इसकी आदत कभी नहीं छूटती। यदि आप एक दिन में 10 सिगरेट पीते हैं, तो एक सप्‍ताह तक 8 कर दीजिये, फिर अगले सप्‍ताह 6, फिर 4, 2, 1 और फिर शून्‍य।

व्रत रखें

भारत में तमाम लोग मन्‍नत मांगते हैं और उसके लिये व्रत रखते हैं। यदि आप वाकई में सिगरेट छोड़ना चाहते हैं, तो कोई भी मन्‍नत मांगें और ईश्‍वर के सामने संकल्‍प लें, कि आपकी मन्‍नत पूरी होने तक आप सिगरेट नहीं पीयेंगे। मन्‍नत ऐसी होनी चाहिये, जो आपके जीवन में सबसे महत्‍वपूर्ण है। तब आप खुद अपने जीवन में बड़ा फर्क देखेंगे। और मन्‍नत पूरी होने के बाद भी आपको सिगरेट पीने की इच्‍छा नहीं होगी। यह व्रत कम से कम 6 महीने का होना चाहिये।

खुद को रिवॉर्ड दें

सिगरेट छोड़ने के बाद आपके जीवन में जो कोई भी अच्‍छे काम हों, उन्‍हें लोगों को बतायें। आपके स्‍वास्‍थ्‍य में जो फर्क पड़े, उसे ध्‍यान से वॉच करें।

शराब छोड़ दें

यदि आप शराब पीते हैं, तो उसे भी कम कर दें, क्‍योंकि शराब पीने के बाद सिगरेट पीने की तलब जरूर लगती है।

एक मनी बॉक्‍स बनायें

एक मनी बॉक्‍स बनायें और जब भी सिगरेट पीने की इच्‍छा हो, जितने की सिगरेट है, उतने पैसे उस बॉक्‍स में डाल दें। फिर महीने के अंत में उस पैसे से अपनी पसंदीदा चीज खरीद कर लायें। यदि आप उस पैसे से अपनी गलफ्रेंड, पत्‍नी या बच्‍चों के लिये कोई गिफ्ट खरीदते हैं, तो आपको अजब सा सुकून मिलेगा। हां आप यह पैसा किसी जरूरतमंद को भी दान कर सकते हैं।

ऐशट्रे और लाइटर फेंक दें

सिगरेट छोड़ने से ठीक पहले ऐशट्रे और लाइटर फेंक दें। क्‍योंकि जब तक वो आपके साथ हैं आपका मन उतावला जरूर होता रहेगा।

सिगरेट न छोड़ पाने का एक खास रासायनिक कारण भी है। आपकी केमिस्ट्री निकोटिन या कैफीन या बाकी चीजों पर निर्भर हो गई है। इसे बदला जा सकता है। अगर आप सिर्फ शांभवी महामुद्रा  करें तो आप देखेंगे कि आपका पूरा सिस्टम इतना सक्रिय हो जाता है, कि सिगरेट, कॉफी, चाय या कुछ और पीने की जरूरत खत्म हो जाती है। उसके बाद जब भी आप ये चीजें लेते हैं, तो वह सिर्फ आनंद के लिए होता है। किसी दिन अगर आपको कॉफी पीने या स्मोकिंग का मन करे, तो आप ऐसा करते हैं मगर उसकी बाध्यता और उस पर शारीरिक निर्भरता खत्म हो जाती है।

शाम्भवी मुद्रा की विधि

ध्यान के किसी आसन में बैठिये और पीठ सीधी कर लीजिए। आपके कंधे और हाथ बिलकुल ढीले होने चाहिए। इसके बाद हाथों को घुटनों पर चिंमुद्रा, ज्ञान मुद्रा या फिर योग मुद्रा में रखिये।हाथों की हथेली आकाश की तरफ होनी चाहिए।अब तर्जनी उंगली को गोलाकार मोडकर अंगूठे के अग्रभाग को स्पर्श करना हैं। और अन्य तीनों उंगलियों को सीधा रखें यह ज्ञान मुद्रा दोनों हाथो से करें ।सामने किसी बिंदु पर दृष्टि एकाग्र कीजिए। इसके बाद उपर देखने का प्रयास कीजिए। ध्यान रखिए सिर स्थिर रहे और अपने विचारों को रोकें और ध्यान दीजिए। इसमें पलकों को बिना झपकाएँ देखते रहें, लेकिन ध्यान किसी भी चीज को देखने पर ना रखें । मन से सारे विचार निकालकर मन को केवल ॐ पर केन्द्रित करना हैं।

समय सीमा
यह अभ्यास प्रारंभ में कुछ देर कीजिए। अभ्यास करते हुए इसका समय बढ़ाइए। इसे 3 से 6 मिनट तक कर सकते हैं

सावधानी
यह अभ्यास सरल और सुरक्षित है तथा इसे कोई भी कर सकता है। फिर भी इस आसन को करते समय कुछ सावधानी बरतें। शाम्भवी मुद्रा के लिए जो चीजें बताई गई हैं उसे धीरे-धीरे करें। जल्दबाजी करने की कोशिश न करें। अगर आप किसी तरह की समस्या से पीड़ित हैं या आपको कोई दर्द हो रहा है तो शाम्भवी मुद्रा को करने की कोशिश न करें। अगर आपने चश्मा पहन रखा है उसे निकालकर साइड में रख दें। इस अभ्यास से पहले यदि आपका पेट साफ है  और खाली पेट है तो आप इसे अच्छे से कर सकते हैं।इसके अलावा इस अभ्यास की शुरुआत करने वाले व्यक्ति किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

 

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