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भारत में पोकर आज सिर्फ पत्तों का खेल नही रह गया है , धीरे-धीरे यह एक स्पोर्ट यानि खेल बन रहा है।

राफेल नडाल, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, शेन वॉर्न।

आप जानते हैं कि इन सभी महान खिलाडियों खेलों के महान लोगों के बीच आम क्या है? नहीं, नहीं कि उन्होंने अपने संबंधित खेल – टेनिस, फुटबॉल और क्रिकेट में बड़ी सफलता हासिल की है – लेकिन ये सभी उत्साही और उत्सुक पोकर खिलाड़ी भी हैं। हां, पोकर – भाग्य और कौशल दोनों के मिश्रण का एक कार्ड गेम।

लेकिन ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता कि पोकर न केवल भाग्य का खेल है , बल्कि इस खेल में कौशल, गणित और निर्णय लेने का मादा – तीनों का अद्भुत एवम विलक्षण संगम है।

पोकर की चर्चा हुई और आपको लगता है पहले पत्ते और फिर जुआ । लेकिन शायद आप या तो समझ नही पाते या अनजान बनते है क़ि किस तरह महज एक पत्तो का खेल दिमागी खेल में बदल गया है। किस तरह एक पोकर खिलाडी हाथ के खराब पत्तों के बावजूद अपने अन्य साथी खिलाडियों के खेलने के पैटर्न को समझते हुए और उनके चेहरों के भावों को भांपते हुए बाजी को पलट देता है – दिमागी बात है ।

क्या है पोकर का खेल
पोकर ताश के पत्तों का एक खेल होता है, जिसमें बेट लगाई जाती है। इस खेल में ज्यादातर बेटिंग के चार राउंड होते हैं।
– ये खेल मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है, स्ट्रेट, स्टड पोकर, ड्रॉ पोकर और कम्युनिटी कार्ड पोकर।
– १९७० के बाद अमेरिका में ये खेल कसीनो में तेजी से पॉपुलर हुआ। इससे कई सेलिब्रिटीज भी जुड़ीं।
– दूसरे खेलों की तरह इसमें भी प्राइज मनी करोड़ों में होती है।

कभी लॉयर बनने का सपना देखने वाली एक लड़की आज दुनिया के  बेस्ट पोकर प्लेयरो मे एक है। ये हैं 33 साल की ताइवानी मूल की अमेरिकन मारिया हो। मारिया पोकर प्लेयर होने के साथ ही टीवी एक्ट्रेस और होस्ट भी हैं। उन्हें दुनिया की बेस्ट फीमेल पोकर प्लेयर कहा जा सकता है। दोस्तों की हालत देख छोड़ा लॉयर बनने का सपना…

 -हाइली एजुकेटेज पेरेंट्स की बेटी होने के कारण मारिया के माता-पिता भी उन्हें किसी अच्छे प्रोफेशन में करियर बनाते देखना चाहते थे।
– मारिया के अनुसार, मेरे पेरेंट्स डॉक्टर, लॉयर जैसे फील्ड में ही मेरा भी करियर चाहते थे। जिसे सोसायटी में अच्छा माना जाता था।
– २००५ में कम्युनिकेशन स्टडीज की डिग्री लेने के बाद मारिया ने लॉयर बनने का तय किया। लेकिन लॉ कॉलेज में पढ़ रहे फ्रेंड्स की हालत देखकर मन बदल गया।
– मारिया ने अंडर ग्रैजुएशन के बाद एक साल का गैप लिया और फिर प्रोफेशनल पोकर प्लेयर बनीं।
– हालांकि, मारिया के पेरेंट्स के लिए उनके इस प्रोफेशन को एक्सेप्ट कर पाना काफी मुश्किल था।Image result for story of maria ho a poker player
मारिया ने कॉलेज के दिनों में अपने मित्रों के साथ पोकर खेलना शुरू किया और बहुत जल्द ही इस् खेल के मनिविज्ञान और प्रतिद्विन्दिता से प्रभावित होकर नजदीकी इंडियन कैशिनोज में लिमिट कैशः गेम्स में हाथ आजमाने शुरू कर दिया। २००५ में मारिया ने मास कम्युनिकेशन में डिग्री ली और तभी वह हाई स्टेक्स कैश गेम्स भी खेलने लगी और जल्द ही अपने पोकर बैंकरौल से उत्साहित होकर एक प्रोफेशनल प्लेयर के रूप में अवतरित हुई।
पिछले ४-५ सालों में कई पोकर गेमिंग स्टार्टअप हमारे देश में आये है और लगातार कमाई भी कर रहे है। लेकिन इस बिजनेस में एक डर अभी भी बना हुआ है कि कोई रेग्युलेटरी बाधा न आ जावे। यह गेम उनलोगों के लिए है जो लॉजिक और स्ट्रेटेजी वाले गेम खेलना पसंद करते है और मैथ मे भी अच्छे है। अड्डा ५२, पोकेरबाजी और स्पार्टन पोकर जैसे कई नाम है ऑनलाइन पोकर इंडस्ट्री में । एक अनुमान है कि यह इंड्स्ट्री १५०० करोड़ की हो गयी है और लगभग ६००००-७०००० लोग ऑनलाइन खेल रहे है। आज भारत में प्रोफेशनल पोकर प्लेयर्स क़ी संख्या १००० के ऊपर ही है। इन सभी स्टार्टअप्स के फाउंडर्स का मानना है कि यह जुआ नही बल्कि स्किल वाला खेल है। परंतु चुनौती अभी भी कम नही है इस खेल की नेगेटिव इमेज की वजह से। और फिर अथॉरिटीज की मॉन्यता पाने के लिए इसके स्किल के आस्पेक्ट को समझाना भी टेढ़ी खीर है। हालाँकि हमारे देश में ९५% लोग पुरुष ही है जो इसे प्रोफेशनली खेलते हैं।
हमारे देश में चूंकि जुआ अवैध है, ताश का खेल और दाँव के सभी प्रकार अवैध है , पोकर को लेकर असमंजस है । कर्नाटक और बंगाल में स्थिति भिन्न है जबकि गुजरात हाइकोर्ट ने इसे जुआ माना था हालांकि अपील लंबित है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पोकर शब्द से परहेज करते हुए कार्ड गेम्स तक अपने आर्डर को सीमित रखा और अवैध बताया।
Chess champion Viswanathan Anand playing a few hands with IIM Kozhikode Associate Professor Deepak Dhayanithy.
अभी हाल के सालों में पोकर के लीग फॉर्मेट में प्रतियोगिताएं भी चालू हुई है। डाबर के अमित बर्मन ने पी एस एल चालू की और इस सीरीज में दो टूर्नामेंट्स हो भी चुके है। चेस चैंपियन एवम प्रसिद्ध खिलाडी विश्वनाथन आनंद भी इस सीरीज के हिस्सा बने है। दूसरे सीजन में लगभग २०००० कुल खिलाडियों ने विभिन्न फ्रैंचाइज़ी की ११ टीमों में ५ स्थानों के लिए शिरकत की – ये थीं गोवा नट्स, पंजाब बफर्स, राजस्थान टिल्टर्स आदि (विभिन्न राज्यों के नाम पर) – इन सबो ने  कुल इनामी राशि ३.६ करोड़ के लिए जबरदस्त और मजेदार मुकाबला किया।विश्वनाथन आनंद का कहना है –
“The whole idea of my association with the league lies in the fact that I find poker no different from chess and through this alliance we are hopeful that we are able to give the sport the long due prominence and acceptance. The sport has been internationally acknowledged and recognised, and Poker Sports League is an attempt to furnish a platform for the immense poker talent we have in the country.”
हमारे देश में क्लेसरूम्स और होस्टल्स में थोड़े सी राशि से खेले जाने से लेकर कुछ परम्परागत लोगों के दीवाली पर हाथ आजमाने तक पोकर एक अनजान खेल नही रहा है परंतु हाल के सालों में इसकी ग्रोथ का मुख्य कारण इंटरनेट ही रहा है। इस संदर्भ में दीपक धयानीति , एसोसिएट प्रोफेसर आईआईएम कोज़हिकोड़े कहते है- “When you play live, you play about 15 hands an hour. But when you play online you may end up playing double the number of hands in an hour. A 25-year-old youngster who has been playing poker for 4 years has the poker age of a 45-year-old.” जिस तरह पोकर में रूचि हमारे देश में बढ़ी है , आईआईएम कोज़हिकोड़े ने अपने एमबीए स्टूडेंट्स के लिए पोकर आधारित ऐच्छिक कोर्स “कंपीटिटिव स्ट्रेटेजी- द गेम ऑफ़ पोकर” के नाम से शुरू किया है। दुनिया की उच्चतम यूनिवर्सिटीज जैसे हार्वर्ड लॉ और एमआईटी में तो पहले से ही पोकर संबंधित चीजें है , जबकि आईआईएम ने तो २०१३-१४ के सत्र से ही लागू किया “I’ve been aware of poker as a sport, competition and game for about 20 years now and in that time-span, it has gained a lot of credibility. A lot of poker players in India are good and a lot of them come from stellar educational backgrounds like IITs, and many even come from the business world.”- दीपक धयानीति और भी कहते है।२०१४-१५ के बैच में ६० स्टूडेंट्स ने इस कोर्स को ऑप्ट किया था और यह संख्या २०१७-१८ में १८० पर पहुंच गयी। 
 
पोकर स्पोर्ट्स लीग के दूसरे सीजन के टेक्सास होल्डम का टीवी ब्रॉडकास्ट भी हुआ और हमारे देश में यह पहली बार हुआ। इसके अलावा पी एस एल के आगमन के बाद देश में तीन अन्य पोकर लीग शुरू हुए है, यह इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। इस तरह भले ही धीरे धीरे यह खेल विश्वसनीयता प्राप्त कर रहा है , वह दिन दूर नही जब पोकर की पहचान सिर्फ पत्तो के खेल की ही नही रह जायेगी ।
जरूरत इस बात की भी है कि आयोजक और स्पॉन्सर्स पोकर को रात के अंधेरे से बाहर निकाले और टूर्नामेंट्स दिन के समय करावें ताकि टीवी ब्रॉडकास्ट का मकसद पूरा हो और अधिक से अधिक लोग इस खेल में रूचि लें।

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