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चुनाव: सपा और बसपा मिलकर लड़ेंगे चुनाव, कांग्रेस बाहर

चुनावी मौसम चल रहा है। छोटी मोटी फेर बदल तो देखने को मिलेगी ही। लेकिन इस समय हमारे पास जो खबर आ रही है वो सच में चौकाने वाली है। दो दिन पहले जब अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस की घोसणा की थी तब से सब के मन कुछ न कुछ सवाल ज़रूर बन रहे थे। अखिलेश यादव ने कहा था कि  ये प्रेस कांफ्रेंस वो मायावती जी के साथ करेंगे। इससे इतना तो साफ़ हो गया ये प्रेस कांफ्रेंस चुनाव की किसी महत्वपूर्ण घोसणा करने के लिए हो रहा है।

चौकाने वाली बात तो यह थी कि  इस प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस का कोई नाम नहीं था। सपा की ओर से अखिलेश यादव और बसपा की तरफ से मायावती जी आने वाली थी लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई नहीं आने वाला था। इस खबर को सुन कर एक बार तो मन में आया  महागठबंधन में से कहीं कांग्रेस का पत्ता कट तो नहीं गया। लेकिन ये शक तब यकीन में बदल गया जब आज १२ जनवरी की सुबह अखिलेश यादव और मायावती जी ने प्रेस कांफ्रेंस की ।

दोनों राजनैतिक दलों के मुख्य नेताओं ने यह घोसणा कर दी कि  सपा और बसपा मिलकर २०१९ का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश यादव ने यह भी साफ़ कर दिया है की इस गठबंधन में कांग्रेस के लिए कोई स्थान नहीं है। इस खबर को सुनकर राहुल गाँधी परेशान ज़रूर होंगे हालाँकि जाहिर नहीं करेंगे लेकिन सपा और बसपा का यही फैसला है। अखिलेश यादव का कहना है की २०१८ के उपचुनावों से यह साफ़ हो चुका है की बसपा और सपा मिलकर भाजपा को हरा सकते हैं। अब ये इनका विश्वास है या घमंड , ये तो २०१९ के चुनाव के बाद ही पता चलेगा।

ऐसा भी नहीं है की सपा और बसपा मिलकर कांग्रेस का विरोध कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने यह भी कह दिया है की २०१९ के लोकसभा चुनाव में अमेठी और राय बरेली से सपा या बसपा का कोई उम्मीदवार नहीं होगा। इसका मतलब २०१९ के चुनाव सपा और बसपा में से कोई भी अमेठी और राय बरेली का चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके लड़ने से भी कांग्रेस को कोई फर्क नहीं पड़ता क्यूंकि राय बरेली से सोनिया गाँधी को हराना लगभग असंभव है। अगर बात करें अमेठी की तो वहां राहुल गाँधी के लिए पहले से ही स्मृति ईरानी खड़ी हैं। स्मृति ईरानी को पिछली बार हार का सामना करना पड़ा था लेकिन इस बार दावेदारी और भी मजबूत होगी।

अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि  अगर कोई मायावती जी का अपमान करता है तो ये सपा का अपमान होगा , इसलिए कोई भी मायावती जी का अपमान ना करें। इस चुनावी प्रेस कांफ्रेंस से उत्तर प्रदेश का चुनावी हवा एकदम गर्म हो गया है। अगर बात करें भजपा की तो मौसम उनके भी अनुकूल नहीं है। भले ही उनके विपक्ष वाले गठबंधन में कांग्रेस नहीं है लेकिन सपा और बसपा का मिलन उन्हें काफी महंगा पड़ने वाला है। ये है २०१४ के लोकसभा चुनाव के नतीजे –

पार्टी का नाम सीटें जीतीं
भारतीय जनता पार्टी 71
समाजवादी पार्टी 5
बहुजन समाज पार्टी 0
कांग्रेस 2
अपना दल 2
राष्ट्रीय लोक दल 0

 

तो यह है २०१४ के लोकसभा चुनाव का लेखा जोखा। इस बार जनता योगी आदित्यनाथ से थोड़ी नाराज़ है इसलिए २०१९ के नतीजों भारी फर्क आ सकता है। अब दिल थाम कर बैठ जाईये और २०१९ के चुनाव में पूरी ईमानदारी से अपना अमूल्य वोट डालें। एक और बात का ख़ास ख़याल रखें की इस बार आप NOTA को भी चुन सकते हैं। अगर आपको कोई पार्टी पसंद नहीं है तो अपना वोट NOTA पर ही डालें।

AUTHOR : RISHAV RAI

 

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