SOCIAL

14 फरवरी का सच: वायरल मैसेज

करोड़ो भारतीय १४ फरवरी को वेलेंटाइन डे मनाते हैं। लेकिन वहीं कुछ धर्म समुदायों का कहना है कि  वैलेंटाइंस डे का विरोध हो | इसी का नतीजा है एक मेसेज, जो हर साल १४ फरवरी के आसपास इंटरनेट और सोशल मीडिया पर टहलता रहता है कि इसी दिन अमर शहीद भगतसिंह राजगुरु और सुखदेव को लाहौर में फांसी की सजा सुनाई थी , इसलिए लोगों से अपील की जा रही है कि वे १४ फरवरी को बतौर शहीद दिवस मनाएं। तो उन्हें ये सच जान लेना और मान लेना चाहिए कि १४ फरवरी से भगत सिंह की सजा या फांसी का कोई ताल्लुक नहीं है। 

इतिहासकारों और दस्तावेजों के मुताबिक भगत सिंह का जन्म २७ सितंबर १९०७ को हुआ था। इनके मुताबिक भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को २३ मार्च १९३१ को फांसी दी गई। 

१४ फरवरी की सच्चाई क्या है?

कई इतिहास के जानकारों का कहना है कि १४ फरवरी से भगत सिंह का रिश्ता ये है कि १४ फरवरी १९३१ को मदन मोहन मालवीय जी ने फांसी से ठीक ४१ दिन पहले एक मर्सी पिटीशन ब्रिटिश भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन के दफ्तर में डाली थी, जिसको इरविन ने खारिज कर दिया था।  हालांकि कई रिपोर्ट्स का कहना है कि इतिहास में ऐसे भी किसी दावे की पुष्टि नहीं होती। 

इतिहास में २३ मार्च ही शहीदी दिवस के रूप में दर्ज है। १४ फ़रवरी न तो वह दिन था जिस दिन फांसी की सजा सुनाई गई और न ही वह दिन था जिस दिन फांसी दी गई।लेकिन फ़िर भी फेसबुक और व्हाट्सऐप पर अब ये विरोध भगत सिंह के शहीदी दिवस को जोड़कर चलने लगा है। 

AUTHOR : RITESH RAI 

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *