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सुप्रीम कोर्ट : सजा तो आखिर सजा ही है !

सुप्रीम कोर्ट ने अभी अभी सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को कोर्ट की अवमानना का दोषी करार दिया है। कोर्ट ने राव पर १ लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही उन्हें आदेश दिया है कि दिनभर वे कोर्ट में किनारे बैठे रहें।  कोर्ट ने कहा कि यह समझ में नहीं आ रहा है कि राव ने बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम जांच कर रहे अधिकारी का ट्रांसफर बिना कोर्ट को बताए क्यों कर दिया।कोर्ट ने उसके आदेश का उल्लंघन करते हुए शर्मा का एजेंसी के बाहर तबादला करने के लिए सात फरवरी को सीबीआई को फटकार लगाई थी और राव को १२ जनवरी को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष उपस्थित होने को कहा था। शर्मा बिहार में बालिका गृह मामले की जांच कर रहे थे।चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने शीर्ष अदालत के पिछले दो आदेशों का उल्लंघन किए जाने को गंभीरता से लेते हुए शर्मा का कोर्ट की पूर्व अनुमति के बगैर १७ जनवरी को सीआरपीएफ में तबादला किए जाने पर राव के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था। 

इससे पहले राव ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी।एम नागेश्वर राव ने स्वीकार किया कि एजेंसी के पूर्व संयुक्त निदेशक एके शर्मा का तबादला करके उन्होंने ‘गलती’ की। राव ने शीर्ष अदालत से इसके लिए माफी मांगते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी। 

यह शायद पहला मामला है जब सीबीआई के किसी उच्च अधिकारी को सजा दी गयी हो। राजनीति भी शुरू हो चुकी है , कांग्रेस इस फैसले को बीजेपी सरकार द्वारा संवैधानिक संस्था के दुरूपयोग से जोड़कर हमलावार हो गयी है तभी तो रणदीप सुरजेवाला ने टिप्पणी करने में किंचित भी देरी नहीं की।   

Pay Rs 1 lakh, go sit in the corner: Supreme Court punishes Nageshwar Rao for contempt

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