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गूगल डूडल :खूबसूरत अदाकारा मधुबाला का ८६ वां जन्मदिन !

गूगल  ने आज का डूडल  मधुबाला  को समर्पित किया है। गूगल ने अपने डूडल  पर मधुबाला की बहुत कलरफुल इमेज बनाकर डाली है और बॉलीवुड की बेहतरीन अदाकार मधुबाला को याद किया है।वेलेंटाइन डे वाले दिन जन्मीं  मधुबाला (बचपन का नाम मुमताज ) के हर अंदाज में प्यार झलकता था। उनमें बचपन से ही सिनेमा में काम करने की तमन्ना थी, जो आखिरकार पूरी हो गई। मुमताज ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष १९४२ की फिल्म ‘बसंत’ से की थी, तब उनकी उम्र मात्र ९ वर्ष थी।  यह काफी सफल फिल्म रही और इसके बाद इस खूबसूरत अदाकारा की लोगों के बीच पहचान बनने लगी।साल १९४७  में आई फिल्म ‘नील कमल’ मुमताज के नाम से उनकी आखिरी फिल्म थी। इसके बाद वह मधुबाला के नाम से जानी जाने लगीं। इस फिल्म में महज चौदह वर्ष की मधुबाला ने राजकपूर के साथ काम किया। 

‘नील कमल’ में अभिनय के बाद से मधुबाला को सिनेमा की ‘सौंदर्य देवी’ कहा जाने लगा. इसके दो साल बाद मधुबाला ने बॉम्बे टॉकिज की फिल्म ‘महल’ में अभिनय किया और फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।  उस समय के सभी लोकप्रिय पुरुष कलाकारों के साथ उनकी एक के बाद एक फिल्में आती रहीं।उन्होने उस समय के सफल अभिनेता अशोक कुमार, रहमान, दिलीप कुमार और देवानंद जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया था।  वर्ष १९५० के दशक के बाद उनकी कुछ फिल्में असफल भी हुईं। असफलता के समय आलोचक कहने लगे थे कि मधुबाला में प्रतिभा नहीं है बल्कि उनकी सुंदरता की वजह से उनकी फिल्में हिट हुई हैं।इन सबके बाबजूद मधुबाला  कभी निराश नहीं हुईं।  कई फिल्में फ्लॉप होने के बाद १९५८ में उन्होंने एक बार फिर अपनी प्रतिभा को साबित किया और उसी साल उन्होंने भारतीय सिनेमा को ‘फागुन’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘काला पानी’ और ‘चलती का नाम गाड़ी’ जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। 

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मधुबाला जितनी सुन्दर थी , उनका जीवन उतना ही दर्दभरा था। एक सच्चे साथी की कमी उनके जीवन में हमेशा रही। दिलीप कुमार के प्यार में वे नौ साल तक रही लेकिन ट्रेजेडी किंग ने  शादी से इंकार कर उनका दिल तोड़ दिया। साठ के दशक में वे किशोर कुमार के नजदीक आयी और २७ साल की उम्र में उनसे शादी कर ली।इसी साल १९६० में वे एक भयानक रोग से पीड़ित हो गई।  शादी के बाद रोग के इलाज के लिए दोनों लंदन चले गए।  लंदन के डॉक्टर ने मधुबाला को देखते ही कह दिया कि वह दो साल से ज्यादा जीवित नहीं रह सकतीं।इसके बाद लगातार जांच से पता चला कि मधुबाला  के दिल में छेद है और इसकी वजह से इनके शरीर में खून की मात्रा बढ़ती जा रही थी। डॉक्टर भी इस रोग के आगे हार मान गए और कह दिया कि ऑपरेशन के बाद भी वह ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाएंगी। इसी दौरान उन्हें अभिनय छोड़ना पड़ा।  इसके बाद उन्होंने निर्देशन में हाथ आजमाया।साल १९६९ में मधुबाला  ने फिल्म ‘फर्ज’ और ‘इश्क’ का निर्देशन करना चाहा, लेकिन यह फिल्म नहीं बनी और इसी वर्ष अपना ३६ वां जन्मदिन मनाने के नौ दिन बाद २३ फरवरी,१९६९ को बेपनाह हुस्न की मल्लिका दुनिया को छोड़कर चली गईं। 

किशोर कुमार से भी उन्हें अपेक्षित खुशियाँ नहीं मिली। किशोर कुमार ने उन्हें मायके यह कहकर छोड़ दिया कि वो काम की वजह से ज्यादातर बाहर रहते हैं और उनका ख्याल नहीं रख सकते। किशोर ने साथ ही उनकी देखभाल के लिए एक नर्स और ड्राइवर को भी उनके पास छोड़ दिया। इस बात से मधुबाला एक बार फिर टूट गयी थी। उन्हें इस बात का बड़ा धक्का लगा था।  मधुबाला को जिस समय किशोर के साथ की जरूरत थी उस समय उनके पास कोई नहीं था। हालाँकि किशोर उनसे मिलने आया करते थे , २-३ महीने में एक बार और उन्होंने मधुबाला के इलाज का खर्च अंतिम समय तक उठाया। 

मधुबाला ने लगभग ७० से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने ‘बसंत’, ‘फुलवारी’, ‘नील कमल’, ‘पराई आग’, ‘अमर प्रेम’, ‘महल’, ‘इम्तिहान’, ‘अपराधी’, ‘मधुबाला’, ‘बादल’, ‘गेटवे ऑफ इंडिया’, ‘जाली नोट’, ‘शराबी’ और ‘ज्वाला’ जैसी फिल्मों में अभिनय से दर्शकों को अपनी अदा का कायल कर दिया। 

     

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