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बदला मूवी : हूबहू स्पेनिश फिल्म ‘द इनविजिबल गेस्ट’ है ; कुछ नहीं बदला !

डायरेक्टर सुजॉय घोष की ‘कहानी’ के बाद एक लंबे समय से बॉलीवुड में भी सस्पेंस थ्रिलर नहीं आया था। सुजॉय घोष ने सस्पेंस थ्रिलर के रूप में अपना एक जॉनर पकड़ लिया है और यह कहना गलत नहीं होगा कि इसमें उन्होंने महारथ भी हासिल कर ली है। हमारे यहां ब्रॉडबैंड की लगातार बढ़ रही रफ्तार कई सारे उद्योगों के समीकरण बदल रही है।  अमेरिका की तरह यहां भी जल्द ही ‘स्मार्ट होम’ का कॉन्सेप्ट घरों में सुचारू रूप से काम करने लगेगा क्योंकि ऑप्टिकल फाइबर की मदद से इंटरनेट प्रदान करने वाली कुछ कंपनियों ने सौ एमबीपीएस तक की रफ्तार से डाटा डाउनलोड करने की सुविधा देना शुरू कर दिया है, जैसे कि रिलायंस गीगा फाइबर और वह भी फ़िलहाल मुफ्त। यह रफ्तार जल्द ही एक गीगाबाइट तक पहुंचेगी और ऑप्टिकल फाइबर का जाल देशभर में फैलते ही ‘स्मार्ट होम’ की परिकल्पना अमेरिका की तरह ही हिंदुस्तान में भी साकार होना शुरू हो जाएगी।इसी (असली और सस्ते) तेज रफ्तार इंटरनेट के चलते नेटफ्लिक्स और अमेजॉन प्राइम जैसे ऑनलाइन मंच भी घर-घर तक पहुंच रहे हैं और बची-खुची बफरिंग वाली थकाऊ प्रक्रिया कुछ ही वक्त में गुजरे कल की बात होने वाली है।  ब्रॉडबैंड की रफ्तार में आए इसी बदलाव के चलते हिंदी फिल्म उद्योग के भी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, लेकिन दुख की बात है कि यह उद्योग और इसके फिल्मकार इस बदलाव को ठीक से भांप नहीं पा रहे , तभी कहना पड़ रहा है कि ओरिजिनल फिल्म अगर न देखी हो तो ‘बदला’ आपको जरूर पसंद आएगी।

ये फ़िल्म सुजॉय की अपनी कहानी नहीं है। यह साल २०१७  में आई एक स्पेनिश फ़िल्म ‘द इनविज़िबल गेस्ट’ (The Invisible Guest) का आधिकारिक रीमेक है।इसकी पटकथा को सीन दर सीन नए चेहरों और नयी भाषा के साथ फिल्माया भर गया है। कुछ नए संवाद जोड़े गए हैं और महाभारत की कुछ उक्तियों और व्यक्तियों का उदाहरण भर लेकर फिल्म को गहरा फलसफा देने की कम कामयाब कोशिश की गई है।  ‘द इनविजिबल गेस्ट’ पिछले काफी वक्त से नेटफ्लिक्स पर मौजूद है और दुनिया-भर की उम्दा व दर्शनीय फिल्मों पर नजर रखने वाले सिनेप्रेमी इसे काफी पहले देख भी चुके होंगे। इसलिए ‘बदला’ के प्रति उत्सुकता केवल सुजॉय घोष के चलते पैदा हुई थी कि आखिर वे किस अंदाज में बदला लेने की इस परिचित कहानी को बदल देंगे। हालाँकि इस नजरिये से सुजॉय निराश करते है।  फिर भी  ‘बदला’ पूरी तरह से एक कसी हुई फ़िल्म है। पूरी फ़िल्म में एक अपराध को लेकर एडवोकेट पक्ष और विपक्ष में बहस करते हैं। जहां दोनों पक्ष एक दूसरे को खूनी साबित करने के लिए बहस करता है। लेकिन, अंत में खूनी कौन निकलता है..इसी ताने-बाने पर बुनी गयी है फ़िल्म बदला।

अभिनय की बात करें तो अमिताभ बच्चन बिल्कुल एक अलग ही फॉर्म में नज़र आते हैं। उनका डायनामिक्स देखते ही बनता है। तापसी पन्नु के लिए यह एक मुश्किल किरदार था। क्योंकि उनके कैरेक्टर की आंतरिक सोच कुछ और है, बाह्य व्यवहार अलग है और कई स्तर पे खुद के किरदार को मांजते हुए उन्होंने इसे बखूबी से निभाया। उसके अलावा अमृता सिंह भी लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर दिखाई देती है। उन्होंने भी अपने किरदार में जान फूंक दी है।

कुल मिलाकर बदला एक कसी हुई सस्पेंस थ्रिलर है। अगर आप सस्पेंस थ्रिलर देखना पसंद करते हैं तो निश्चित रूप से इस सप्ताह यह आपके लिए बेस्ट फ़िल्म होगी। इसे आप परिवार के साथ देख सकते हैं, इसमें कोई भी अश्लीलता नहीं है। यह फ़िल्म आपको बांधे रखती है!

‘कहानी ‘ से तुलना करें तो उसमे एंजेलिना जोली की फिल्म ‘टेकिंग लाइव्स’ (२००४ ) से खलनायक को पकड़ने के लिए गर्भवती होने का नाटक करने वाली नायिका का आइडिया लेकर सुजॉय घोष ने उसे एक शानदार पटकथा में पिरोया था और उस पटकथा का उतना ही कुशल निर्देशन कर उम्दा ‘कहानी’ बन पड़ी थी । वैसा ही कुछ शानदार बदलाव ‘बदला’ से भी अपेक्षित था, लेकिन यह केवल ‘द इनविजिबल गेस्ट’ की सीन दर सीन नकल बनकर रह गई है।बस कुछ किरदारों के जेंडर बदल दिए गए हैं।  जिस मुख्य भूमिका को मूल फिल्म में एक अभिनेता ने निभाया था वह तापसी पन्नू निभा रही हैं और दूसरी जिस मुख्य भूमिका में एक अधेड़ अभिनेत्री मौजूद थीं उनकी जगह अमिताभ बच्चन ने ले ली है। ऐसे ही कुछ और भी हेर-फेर किए गए हैं जिसकी वजह से दर्शनीय अभिनय करते हुए अरसे बाद अमृता सिंह नजर आयी हैं।  

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