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#bycottSurfExcel : ओछी मानसिकता की पराकाष्ठा है !

दरअसल सर्फ एक्सल  ‘रंग लाए संग’ कैंपेन के जरिए होली पर हिंदू-मुस्लिम सद्भाव का संदेश देने की कोशिश कर रहा है । करीब एक मिनट के इस ऐड में दिखाया गया है कि सफेद टी-शर्ट पहने एक हिंदू लड़की पूरी गली में साइकिल लेकर घूमती है और बालकनी और छतों से रंग फेंक रहे सभी बच्चों के रंग अपने ऊपर डलवाकर खत्म करा देती है। रंग खत्म हो जाने के बादवह अपने मुस्लिम दोस्त के घर के बाहर जाकर कहती है कि ‘बाहर आजा सब खत्म हो गया। ‘ बच्चा घर से सफेद कुर्ता-पजामा और टोपी पहने निकलता है, बच्ची उसे साइकिल पर बैठाकर मस्जिद के दरवाजे पर छोड़ती है। आखिरी में उसके सीढ़ी चढ़ते वक्त बच्चा कहता है नमाज़ पढ़ के आता हूं। वह कहती है, बाद में रंग पड़ेगा।  इस पर उसका मुस्लिम दोस्त धीमे से मुस्कुरा देता है। विज्ञापन अंत में कहता है ‘अपनेपन के रंग से औरों को रंगने में दाग लग जाएं तो दाग अच्छे हैं।’  चूँकि सर्फ एक्सल की परंपरागत टैगलाइन ‘दाग अच्छे हैं’ है, सर्फ एक्सल के इस विज्ञापन के ज़रिए हिंदुस्तान यूनीलीवर ने ये संदेश देने कि कोशिश की थी कि रंगों के जरिए समाज साथ आ सकता है। 

अफ़सोस ,कुछ लोग इसे हिंदू फोबिक और विवादित करार दे रहे हैं। इस वीडियो को लोग लवजेहाद से भी जोड़ रहे हैं जो तुच्छ सोच और मानसिकता का परिचायक है।  इसी को लेकर सर्फ एक्सल को बायकॉट करने की भी बात की जा रही है।इसी को लेकर पतंजलि आयुर्वेद के प्रमुख और योग गुरु बाबा रामदेव ने भी सर्फ एक्सल की धुलाई करने की बात कही है। रामदेव ने ट्वीट किया है, ‘हम किसी भी मजहब के विरोध में नहीं हैं, लेकिन जो चल रहा है उस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. लगता है जिस विदेशी सर्फ से हम कपड़ों की धुलाई करते हैं अब उसकी धुलाई के दिन आ गए हैं?’ 

वैसे इस एड को बनाने वाले की सोच पर सवाल तो नहीं खड़ा किया जा सकता ; उसे आजादी है।  लेकिन कितना सुंदर वाक्या होता यदि वो साइकिल पर सवार बच्ची बोलती डरो मत भाई, सब मिलकर होली खेलें। या फिर वो छोटा बच्चा स्वयं ही रंगो से भरी बालटी सब बच्चों पर डाल देता और कहता, “होली है”।बच्चों को यह सीख देना कि एक धर्म के लोगों पर रंग डाल सकते हैं व दूसरे विशेष धर्म के लोगों पर नहीं, कुछ सही नहीं लगता। बच्चों को तो केवल सर्व धर्म एक सम्मान की सीख मिलनी चाहिए। क्यूँकि यदि बच्चों के मन में ही ऐसा बीज बोया जाएगा तो ज़ाहिर तौर पर बड़े होने पर भी उनके मन में सब धर्मों के बीच में भेदभाव वाली भावना ही रहेगी।

मेरी समझ में तो इस विज्ञापन को धर्मों को बाँटने की बजाय धर्मों में प्यार की भावना जगानी चाहिए थी। धर्मों में फूट डलवाने वाले तो काफ़ी लोग पहले ही हैं, काश कि कोई विज्ञापन सब त्योहारों को मिलकर प्रेमपूर्वक मनाने की भी सीख देता।

फिर दूसरा पहलू भी है ,if you can see in that ad you will see that they were celebrating the both religion cultures as Namaj and Holi.I want to prefer you to watch again ad and notice last line that the girl says after namaj you will be colored and he says ‘yes’. But, Namaj needs clean clothes. So girl saves him from colours and after that she says him to play holi and he says yes.This ad shows unity not division or anything else.

कहने का मतलब है हमें व्यर्थ के पोलिटिकल स्टंट्स में नहीं पड़ना चाहिए ; पतंजलि विवाद को हवा दे रही है तो शुद्ध व्यवसायिक हित ही है।निठल्लेपन का आलम ये है कि लोग एक डिटर्जेंट पाउडर के खिलाफ चार दिन से कैंपेन चला रहे हैं। 

 

 

 

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